सरकारी अस्पतालों में बदला इलाज का वक्त
सुबह आठ और शाम पांच बजे से खुलेंगे अस्पताल, इमरजेंसी डयूटी अलग से रहेगी, नई व्यवस्था एक जुलाई से, जाँचे गये मरीजों का ब्यौरा भी देंगे डाक्टर, प्रयोगशाला और एक्स-रे का काम सुबह नौ बजे से
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को जनआकांक्षाओं के अनुरूप तैयार किए जाने की कोशिशों में आज एक और कड़ी जोड़ते हुए इन संस्थाओं में इलाज का नया वक्त तय कर दिया गया है। अब दो शिफ्टों में ये अस्पताल काम करेंगे। राज्य सरकार के इस सिलसिले में जारी आदेश के मुताबिक सारे सरकारी अस्पताल अब सुबह की शिफ्ट में आठ से चलकर दोपहर एक बजे तक खुले रहेंगे। शाम को इनका वक्त पांच से छह बजे तक रहेगा। इमरजेंसी डयूटी इस तयशुदा वक्त से अलग रहेगी यानी जब भी इसकी जरूरत हो डॉक्टरों को डयूटी बजाना होगी। प्रशासकीय कसावट लाने के लिये यह भी तय किया गया है कि डॉक्टर अब अस्पताल की डयूटी और बाहर भी उनके द्वारा जाँचे जाने वाले मरीजों का ब्यौरा पेश करेंगे। प्रयोगशाला में जाँच के लिये नमूनों को दोपहर एक बजे तक इकट्ठा किया जायेगा और इनमें जाँच का काम सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक चलेगा। नई व्यवस्था एक जुलाई, 2008 से लागू होगी।
राज्य सरकार ने सरकारी अस्पतालों में बाहर के और भर्ती मरीजों की चिकित्सा जाँच के लिये अब तक निर्धारित सुबह नौ से शाम चार बजे तक के वक्त को आज एक आदेश के जरिये बदल दिया है। मरीजों और डॉक्टरों की सहूलियत के मद्देनजर इसके पहले तयशुदा वक्त को बहाल किया गया है। आदेश के मुताबिक जिला और नगर पालिक निगम मुख्यालयों के सरकारी अस्पताल और औषधालय अब बाहरी और भर्ती मरीजों की जाँच के लिये सुबह आठ से दोपहर एक बजे या काम खत्म होने तक तथा शाम को पांच से छह बजे या काम खत्म होने तक चलते रहेंगे। यह तयशुदा नया वक्त ही प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और औषधालयों के लिये भी लागू होगा।
बेहतर किस्म के इलाज और बाहरी और भर्ती मरीजों की सहूलियत को देखते हुए प्रयोगशालाओं में नमूनों को इकट्ठा करने और फिर परीक्षण करने का वक्त भी मुकर्रर किया गया है। इस सिलसिले में की गई व्यवस्था बायोकेमिकल, पैथालॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, डेन्टल और फिजियोथेरेपी पर लागू होगी। नमूनों का संकलन दोपहर एक बजे तक होगा और जिला चिकित्सालयों तथा सिविल अस्पतालों में पैथालॉजी प्रयोगशाला और एक्स-रे का काम सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक चलेगा।
आदेश में साफ कर दिया गया है कि नए तयशुदा वक्त के अलावा आपातकालीन डयूटी के लिये भी डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे। ऐसे मामलों में वे अपने मरीजों को दिन हो या रात, कभी भी जाकर देखेंगे। जिन डॉक्टरों के प्रभार में पलंग हैं वे सुबह और शाम दोनो वक्त वार्डों का राउण्ड लेंगे। विशेषज्ञों और चिकित्सा अधिकारियों को यह भी पुख्ता करना होगा कि बाह्य रोगी विभाग में अपने पहले देखे गये मरीज को भी वे हर दिन देख लें।
एक और कड़ी हिदायत यह दी गई है कि सभी चिकित्सा अधिकारी अस्पताल के मुख्य अधीक्षक या अधीक्षक द्वारा तय किये गये इंतजाम के मुताबिक अस्पताल के भीतर जाँचे जाने वाले मरीजों का पूरा ब्यौरा पेश करेंगे। यही ब्यौरा उनके द्वारा बाहर देखे जाने वाले मरीजों को लेकर भी पेश करना होगा।
शनिवार, 28 जून 2008
नर्मदा घाटी विस्थापितों को पंजीयन तथा स्टॉम्प शुल्क में छूट की अवधि बढ़ी
नर्मदा घाटी विस्थापितों को पंजीयन तथा स्टॉम्प शुल्क में छूट की अवधि बढ़ी
राज्य शासन द्वारा नर्मदा घाटी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए परिवारों को पुनर्वास में दी गई विभिन्न सुविधाओं में स्टॉम्प डयूटी तथा पंजीयन शुल्क में छूट भी सम्मिलित है। परियोजनाओं से विस्थापित परिवार उनकों प्राप्त मुआवजे और अनुदान रा6ा से मध्यप्रदे6ा की सीमा में कृषि भूमि अथवा अन्य अचल संपत्ति क्रय करने पर लगने वाला पंजीयन तथा स्टॉम्प शुल्क माफ रहता है। इस शुल्क का भुगतान नर्मदा घाटी विकास प्राधिका द्वारा किया जाता है। पंजीयन और स्टॉम्प शुल्क में छूट की यह अवधि 31 मार्च 2008 तक थी। प्राधिकरण ने विस्थापितों के हित में इस छूट को 31 मार्च 2011 तक कर दिया है। इस आदे6ा से परियोजना विस्थापितों को अचल संपत्ति क्रय करने में स्टॉम्प और पंजीयन शुल्क में छूट अब निरंतर जारी रहेगी। उल्लेखनीय है कि सरदार सरोवर, इंदिरा सागर और ओंकारे6वर परियोजना सहित मान और जोबट परियोजनाओं के विस्थापित किसानों द्वारा बड़ी संख्या में कृष्भिूमि खरीदने में इस सुविधा का लाभ उठाया गया है।
राज्य शासन द्वारा नर्मदा घाटी परियोजनाओं के कारण विस्थापित हुए परिवारों को पुनर्वास में दी गई विभिन्न सुविधाओं में स्टॉम्प डयूटी तथा पंजीयन शुल्क में छूट भी सम्मिलित है। परियोजनाओं से विस्थापित परिवार उनकों प्राप्त मुआवजे और अनुदान रा6ा से मध्यप्रदे6ा की सीमा में कृषि भूमि अथवा अन्य अचल संपत्ति क्रय करने पर लगने वाला पंजीयन तथा स्टॉम्प शुल्क माफ रहता है। इस शुल्क का भुगतान नर्मदा घाटी विकास प्राधिका द्वारा किया जाता है। पंजीयन और स्टॉम्प शुल्क में छूट की यह अवधि 31 मार्च 2008 तक थी। प्राधिकरण ने विस्थापितों के हित में इस छूट को 31 मार्च 2011 तक कर दिया है। इस आदे6ा से परियोजना विस्थापितों को अचल संपत्ति क्रय करने में स्टॉम्प और पंजीयन शुल्क में छूट अब निरंतर जारी रहेगी। उल्लेखनीय है कि सरदार सरोवर, इंदिरा सागर और ओंकारे6वर परियोजना सहित मान और जोबट परियोजनाओं के विस्थापित किसानों द्वारा बड़ी संख्या में कृष्भिूमि खरीदने में इस सुविधा का लाभ उठाया गया है।
नर्मदा घाटी परियोजना नहरों के कार्य को गति देने के लिए भू-अर्जन की विशेष कार्य योजना
नर्मदा घाटी परियोजना नहरों के कार्य को गति देने के लिए भू-अर्जन की विशेष कार्य योजना
आपात प्रावधान के अंतर्गत किसानों को मुआवजे की 80 प्रतिशत राशि का अग्रिम भुगतान
नर्मदा घाटी की इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, और बरगी डायवर्जन परियोजना नहरों के निर्माण कार्य को गति देने के लिए भू-अर्जन की विशेष कार्य योजना को आज यहां उच्च स्तरीय बैठक में अनुमोदन दिया गया। कार्य योजना के तहत भू-अर्जन से संबंधित सभी जिलों में भू-अर्जन कार्यो के लिए जिला कलेक्टरों को संविदा आधार पर आवश्यक अमला नियुक्त करने के अधिकार दिये गये है। इसके अंतर्गत जिला कलेक्टर संविदा आधार पर सेवा निवृत्त प्रथम श्रेणी राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक तथा पटवारियों की सेवाए भू-अर्जन कार्यो के लिए ले सकेगे। भू-अर्जन कार्यो के लिए जहां आवश्यक होगा वहां प्राधिकरण द्वारा कार्यालय भवन की सुविधा भी सुलभ कराई जायेगी। भू-अर्जन से संबंधित कार्यो के लिए प्राधिकरण द्वारा जिला प्रशासन को आवश्यक कम्प्यूटर और कम्प्यूटर ऑपरेटर भी दिये जायेगे। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप भार्गव ने आज यहा परियोजना क्षेत्रों से संबंधित जिले के कलेक्टरों, प्राधिकरण के भू-अर्जन अधिकारियों तथा मुख्य अभियंताओं की बैठक में इस कार्य योजना के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहां आवश्यक हो वहां भू-अर्जन के आपात प्रावधानों का उपयोग करते हुए भूमि स्वामी को मुआवजे की 80 प्रतिशत राशि का तत्काल अग्रिम भुगतान कर दिया जाये। श्री भार्गव ने कहा की भू-अर्जन कार्यो में प्राधिकरण के मैदानी इंजीनियर, भू-अर्जन अधिकारी तथा नहर निर्माण करने वाली एजेंसी के समन्वित प्रयास किये जायें। कार्य योजना के तहत नहर के लिए अर्जित भूमि पर मानसून अवधि का उपयोग करते हुए प्रस्तावित पक्के कार्यो को करने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में संबंधित निर्माण एजेंसियों के वर्षाकालीन कार्य लक्ष्य निर्धारित किये गये।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने सरदार सरोवर, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, मान तथा जोबट परियोजनाओं के लिए बनाई गई मानसून आपात कार्य योजना लागू किये जाने के संबंध में संबंधित कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि इस अवधि में अस्थाई केम्पो और पुनर्वास स्थलों पर मौसमी बीमारियों की रोक थाम के लिए चिकित्सा सुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।
आपात प्रावधान के अंतर्गत किसानों को मुआवजे की 80 प्रतिशत राशि का अग्रिम भुगतान
नर्मदा घाटी की इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, और बरगी डायवर्जन परियोजना नहरों के निर्माण कार्य को गति देने के लिए भू-अर्जन की विशेष कार्य योजना को आज यहां उच्च स्तरीय बैठक में अनुमोदन दिया गया। कार्य योजना के तहत भू-अर्जन से संबंधित सभी जिलों में भू-अर्जन कार्यो के लिए जिला कलेक्टरों को संविदा आधार पर आवश्यक अमला नियुक्त करने के अधिकार दिये गये है। इसके अंतर्गत जिला कलेक्टर संविदा आधार पर सेवा निवृत्त प्रथम श्रेणी राजस्व अधिकारी, राजस्व निरीक्षक तथा पटवारियों की सेवाए भू-अर्जन कार्यो के लिए ले सकेगे। भू-अर्जन कार्यो के लिए जहां आवश्यक होगा वहां प्राधिकरण द्वारा कार्यालय भवन की सुविधा भी सुलभ कराई जायेगी। भू-अर्जन से संबंधित कार्यो के लिए प्राधिकरण द्वारा जिला प्रशासन को आवश्यक कम्प्यूटर और कम्प्यूटर ऑपरेटर भी दिये जायेगे। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री प्रदीप भार्गव ने आज यहा परियोजना क्षेत्रों से संबंधित जिले के कलेक्टरों, प्राधिकरण के भू-अर्जन अधिकारियों तथा मुख्य अभियंताओं की बैठक में इस कार्य योजना के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जहां आवश्यक हो वहां भू-अर्जन के आपात प्रावधानों का उपयोग करते हुए भूमि स्वामी को मुआवजे की 80 प्रतिशत राशि का तत्काल अग्रिम भुगतान कर दिया जाये। श्री भार्गव ने कहा की भू-अर्जन कार्यो में प्राधिकरण के मैदानी इंजीनियर, भू-अर्जन अधिकारी तथा नहर निर्माण करने वाली एजेंसी के समन्वित प्रयास किये जायें। कार्य योजना के तहत नहर के लिए अर्जित भूमि पर मानसून अवधि का उपयोग करते हुए प्रस्तावित पक्के कार्यो को करने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में संबंधित निर्माण एजेंसियों के वर्षाकालीन कार्य लक्ष्य निर्धारित किये गये।
प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने सरदार सरोवर, इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, मान तथा जोबट परियोजनाओं के लिए बनाई गई मानसून आपात कार्य योजना लागू किये जाने के संबंध में संबंधित कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि इस अवधि में अस्थाई केम्पो और पुनर्वास स्थलों पर मौसमी बीमारियों की रोक थाम के लिए चिकित्सा सुविधाओं का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल आज ''उषा किरण योजना'' का शुभारंभ करेंगी
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल आज ''उषा किरण योजना'' का शुभारंभ करेंगी
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल प्रदेश प्रवास के तीसरे दिन 29 जून को शाम छह बजे स्थानीय रविन्द्र भवन में हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और स्वाबलंबन की महत्वाकांक्षी योजना ''उषा किरण योजना'' का शुभारंभ करेंगी। इस अवसर पर श्रीमती पाटिल योजना पर केन्द्रित एक पुस्तिका का विमोचन भी करेंगी। शुभारंभ समारोह में राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले भी उपस्थित रहेंगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन ने महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों पर पूर्ण रोक लगाने और महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से ''घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम-2005'' के तहत उषा किरण योजना बनाई है। योजना में महिलाओं और बच्चों के प्रति जेण्डर पर आधारित हिंसा की सभी कार्यवाहिया जैसे कि शारीरिक, लैंगिक, यौनिक मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक हिंसा के विरुध्द संरक्षण और सहायता का प्रावधान किया गया है। इस योजना से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और बच्चों की अच्छी परवरिश सम्भव हो सकेगी।
योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। इस केन्द्र में एक टेलीफोन रहेगा जिसके नम्बर का समुचित प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इस केन्द्र में चौबीसो घंटे एक न एक आपरेटर उपस्थित रहेगा ताकि पीड़ित महिला के फोन आने पर उसे तत्काल सहायता के लिये प्रभारी अधिकारी के सामने पहुंचाया जा सके।
योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में शेल्टर होम की स्थापना प्रस्तावित है। वर्तमान में चार जिलों में नारी निकेतन और आठ जिलों में स्वाधार गृह संचालित हैं। शेष जिलों में आश्रयगृह की सुविधा वाले सेवा प्रदाता को पंजीकृत कर अनुदान दिया जायेगा। केन्द्र शासन द्वारा स्वाधार गृह के प्रस्ताव के मंजूर होने तक हेल्प डेस्क से प्रताड़ित महिला-बच्चों को अस्थायी आश्रय, कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता, चौबीस घंटे हेल्पलाईन, आवश्यक प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, विपणन व्यवस्था, आर्थिक समृध्दि और पुनर्वास तथा सूचना बैंक की सेवाएं दी जायेंगी। इन सेवाओं के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, विधि, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभाग उत्तरदायी होंगे। पीड़िता के पुनर्वास के लिये रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, सहकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं अन्य संबंधित विभाग सहयोग करेंगे।
योजना की मानीटरिंग एवं समन्वय के लिये जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की समिति में पुलिस अधीक्षक, जिला विधिक सहायता अधिकारी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी, संरक्षण अधिकारी उषा किरण योजना और जिला अभियोजन अधिकारी सदस्य होंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी समिति के पदेन सचिव होंगे।
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल प्रदेश प्रवास के तीसरे दिन 29 जून को शाम छह बजे स्थानीय रविन्द्र भवन में हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और स्वाबलंबन की महत्वाकांक्षी योजना ''उषा किरण योजना'' का शुभारंभ करेंगी। इस अवसर पर श्रीमती पाटिल योजना पर केन्द्रित एक पुस्तिका का विमोचन भी करेंगी। शुभारंभ समारोह में राज्यपाल डॉ. बलराम जाखड़, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री कुसुम सिंह महदेले भी उपस्थित रहेंगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन ने महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों पर पूर्ण रोक लगाने और महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से ''घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम-2005'' के तहत उषा किरण योजना बनाई है। योजना में महिलाओं और बच्चों के प्रति जेण्डर पर आधारित हिंसा की सभी कार्यवाहिया जैसे कि शारीरिक, लैंगिक, यौनिक मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक हिंसा के विरुध्द संरक्षण और सहायता का प्रावधान किया गया है। इस योजना से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और बच्चों की अच्छी परवरिश सम्भव हो सकेगी।
योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। इस केन्द्र में एक टेलीफोन रहेगा जिसके नम्बर का समुचित प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इस केन्द्र में चौबीसो घंटे एक न एक आपरेटर उपस्थित रहेगा ताकि पीड़ित महिला के फोन आने पर उसे तत्काल सहायता के लिये प्रभारी अधिकारी के सामने पहुंचाया जा सके।
योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में शेल्टर होम की स्थापना प्रस्तावित है। वर्तमान में चार जिलों में नारी निकेतन और आठ जिलों में स्वाधार गृह संचालित हैं। शेष जिलों में आश्रयगृह की सुविधा वाले सेवा प्रदाता को पंजीकृत कर अनुदान दिया जायेगा। केन्द्र शासन द्वारा स्वाधार गृह के प्रस्ताव के मंजूर होने तक हेल्प डेस्क से प्रताड़ित महिला-बच्चों को अस्थायी आश्रय, कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता, चौबीस घंटे हेल्पलाईन, आवश्यक प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, विपणन व्यवस्था, आर्थिक समृध्दि और पुनर्वास तथा सूचना बैंक की सेवाएं दी जायेंगी। इन सेवाओं के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, विधि, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभाग उत्तरदायी होंगे। पीड़िता के पुनर्वास के लिये रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, सहकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं अन्य संबंधित विभाग सहयोग करेंगे।
योजना की मानीटरिंग एवं समन्वय के लिये जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की समिति में पुलिस अधीक्षक, जिला विधिक सहायता अधिकारी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी, संरक्षण अधिकारी उषा किरण योजना और जिला अभियोजन अधिकारी सदस्य होंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी समिति के पदेन सचिव होंगे।
किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ दिया जाय
किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ दिया जाय
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण बैंक की वार्षिक साधारण सभी की 46वीं बैठक सम्पन्न
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की वार्षिक साधारण सभा की 46वीं बैठक में अध्यक्ष श्री किशनसिंह भटोल ने कहा कि किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ अवश्य दिया जाय लाभान्वित कृषकों की सूचियां 30 जून 2008 के पूर्व तक सभी जिला बैकों के सूचना पटल पर लगाई जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ऋण माफी#ऋण राहत योजना का प्रभाव बैकों की वसूली पर अवश्य पड़ेगा। आगामी वसूली की रूपरेखा अभी से तैयार की जाय।
श्री भटोल ने कहा कि वैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसा के अनुसार जिला बैकों की हानियों की भरपाई 31 मार्च 07 की स्थिति के आधार पर की जाना है। इसके लिए 474.11 करोड़ के प्रस्ताव शासन#नावार्ड को भिजवाये गए है ऋण माफी की योजना के प्रभाव को दृष्ट्रिगत रखते हुए वैद्यनाथन कमेटी में प्राप्त होने वाली राशि 31 मार्च 08 स्थिति के आधार पर प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे है। विगत वर्षों से नावार्ड द्वारा ऋण पात्रता मानदंड के राज्य बैंक की वसूली से सम्बध्द किए जाने के कारण जिलों बैकों के ऋण वितरण के लक्ष्य कम प्राप्त हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप बैकों के ऋण व्यापार में भारी गिरावट आई है। श्री भटोल ने कहा कि जिला बैकों के स्तर पर हुई वसूली को आधार मानकर पात्रता निर्धारित की जावे या नावार्ड को वर्ष में भुगतान की गई राशि तक कार्यक्रम उपलब्ध कराया जावे।
राज्य शासन की गारंटी पर बैंक द्वारा नावार्ड से राशि का आहरण कर ऋण वितरण के लिए जिला बैकों को फंड उपलब्ध कराए जाते हैं। ऋण पत्रों की वार्षिक देयताएँ जुलाई एव जनवरी में देय होती है जिसका भुगतान करना वैधानिक रूप से अनिवार्य है अन्यथा नावार्ड बैंक को डिफाल्टर की श्रेणी में रखकर पुनर्वित्त बंद कर सकता है। नावार्ड के मापदण्ड के अनुसार वर्ष 2008-09 में 72 करोड़ 72 लाख का ऋण वितरण किया जा सकेगा। जिसमें नावार्ड से 68 करोड़ 83 लाख का पुनर्वित्त प्राप्त होगा। ऋण माफी#ऋण वसूली के कारण वसूली की स्थिति में सुधार के बाद नावार्ड से असीमित पात्रता प्राप्त होने की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए 200 करोड़ का ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। बैंक सतत प्रयासरत है कि जिला बैकों को दीर्घकालीन कृषक सदस्यों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध हो। वार्षिक साधारण सभा की बैठक में वर्ष 2006-07 का वार्षिक प्रतिवेदन और अंकेक्षण प्रतिवेदन को स्वीकार किया जाकर वर्ष 2008-09 के बजट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा वर्ष 2006-07 के अर्जित शुध्द लाभ विभाजन को स्वीकृति दी गई। बैठक में विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण बैंक की वार्षिक साधारण सभी की 46वीं बैठक सम्पन्न
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक की वार्षिक साधारण सभा की 46वीं बैठक में अध्यक्ष श्री किशनसिंह भटोल ने कहा कि किसानों को ऋण माफी योजना का लाभ अवश्य दिया जाय लाभान्वित कृषकों की सूचियां 30 जून 2008 के पूर्व तक सभी जिला बैकों के सूचना पटल पर लगाई जाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ऋण माफी#ऋण राहत योजना का प्रभाव बैकों की वसूली पर अवश्य पड़ेगा। आगामी वसूली की रूपरेखा अभी से तैयार की जाय।
श्री भटोल ने कहा कि वैद्यनाथन कमेटी की अनुशंसा के अनुसार जिला बैकों की हानियों की भरपाई 31 मार्च 07 की स्थिति के आधार पर की जाना है। इसके लिए 474.11 करोड़ के प्रस्ताव शासन#नावार्ड को भिजवाये गए है ऋण माफी की योजना के प्रभाव को दृष्ट्रिगत रखते हुए वैद्यनाथन कमेटी में प्राप्त होने वाली राशि 31 मार्च 08 स्थिति के आधार पर प्राप्त करने के प्रयास किए जा रहे है। विगत वर्षों से नावार्ड द्वारा ऋण पात्रता मानदंड के राज्य बैंक की वसूली से सम्बध्द किए जाने के कारण जिलों बैकों के ऋण वितरण के लक्ष्य कम प्राप्त हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप बैकों के ऋण व्यापार में भारी गिरावट आई है। श्री भटोल ने कहा कि जिला बैकों के स्तर पर हुई वसूली को आधार मानकर पात्रता निर्धारित की जावे या नावार्ड को वर्ष में भुगतान की गई राशि तक कार्यक्रम उपलब्ध कराया जावे।
राज्य शासन की गारंटी पर बैंक द्वारा नावार्ड से राशि का आहरण कर ऋण वितरण के लिए जिला बैकों को फंड उपलब्ध कराए जाते हैं। ऋण पत्रों की वार्षिक देयताएँ जुलाई एव जनवरी में देय होती है जिसका भुगतान करना वैधानिक रूप से अनिवार्य है अन्यथा नावार्ड बैंक को डिफाल्टर की श्रेणी में रखकर पुनर्वित्त बंद कर सकता है। नावार्ड के मापदण्ड के अनुसार वर्ष 2008-09 में 72 करोड़ 72 लाख का ऋण वितरण किया जा सकेगा। जिसमें नावार्ड से 68 करोड़ 83 लाख का पुनर्वित्त प्राप्त होगा। ऋण माफी#ऋण वसूली के कारण वसूली की स्थिति में सुधार के बाद नावार्ड से असीमित पात्रता प्राप्त होने की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए 200 करोड़ का ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है। बैंक सतत प्रयासरत है कि जिला बैकों को दीर्घकालीन कृषक सदस्यों को अल्पकालीन ऋण उपलब्ध हो। वार्षिक साधारण सभा की बैठक में वर्ष 2006-07 का वार्षिक प्रतिवेदन और अंकेक्षण प्रतिवेदन को स्वीकार किया जाकर वर्ष 2008-09 के बजट एवं ऋण वितरण कार्यक्रम का अनुमोदन किया गया। इसके अलावा वर्ष 2006-07 के अर्जित शुध्द लाभ विभाजन को स्वीकृति दी गई। बैठक में विभिन्न जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
आज हज-2008 की कुरआ अंदाजी (ड्रा) कार्यक्रम का आयोजन
आज हज-2008 की कुरआ अंदाजी (ड्रा) कार्यक्रम का आयोजन
मध्यप्रदेश स्टेट हज कमेटी के माध्यम से इस साल हज-2008 में जाने वाले इच्छुक हज यात्रियों के लिये कुरआ अंदाजी (ड्रा) का कार्यक्रम रविवार 29 जून को प्रात: 10 बजे से आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम राजधानी के बाग़ो बहार, होटल इम्पीरियल सेवरे के सामने, वी.आई.पी. रोड, खानूगांव में आयोजित किया गया है।
मध्यप्रदेश स्टेट हज कमेटी के माध्यम से इस साल हज-2008 में जाने वाले इच्छुक हज यात्रियों के लिये कुरआ अंदाजी (ड्रा) का कार्यक्रम रविवार 29 जून को प्रात: 10 बजे से आयोजित किया गया है। यह कार्यक्रम राजधानी के बाग़ो बहार, होटल इम्पीरियल सेवरे के सामने, वी.आई.पी. रोड, खानूगांव में आयोजित किया गया है।
पदस्थापनाएं
पदस्थापनाएं
राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों की पदस्थापना के आदेश जारी किये हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आज जारी किये गये आदेश में अवकाश से लौटने पर श्री अनिरूध्द मुकर्जी को अपर सचिव वन विभाग के पद पर पदस्थ किया है।
इसी आदेश में सामाजिक न्याय तथा जेल विभाग में अपर सचिव श्री जब्बार ढाकवाला को अपर सचिव महिला एवं बाल विकास और श्री एस.एन. शर्मा को स्कूल शिक्षा विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है।
इसके अलावा राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री ललित दाहिमा को उप सचिव, सामाजिक न्याय एवं जेल विभाग के पद पर पदस्थ किया गया है।
राज्य शासन ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों की पदस्थापना के आदेश जारी किये हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा आज जारी किये गये आदेश में अवकाश से लौटने पर श्री अनिरूध्द मुकर्जी को अपर सचिव वन विभाग के पद पर पदस्थ किया है।
इसी आदेश में सामाजिक न्याय तथा जेल विभाग में अपर सचिव श्री जब्बार ढाकवाला को अपर सचिव महिला एवं बाल विकास और श्री एस.एन. शर्मा को स्कूल शिक्षा विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ किया गया है।
इसके अलावा राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी श्री ललित दाहिमा को उप सचिव, सामाजिक न्याय एवं जेल विभाग के पद पर पदस्थ किया गया है।
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