मंगलवार, 25 मार्च 2008

ग्वालियर संभाग में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली 6 हजार 900 से अधिक बालिकाओं को मिली साईकिलें

ग्वालियर संभाग में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली 6 हजार 900 से अधिक बालिकाओं को मिली साईकिलें

25 मार्च 08/निशुल्क साईकिल वितरण योजना के तहत ग्वालियर संभाग में चालू वित्तीय वर्ष में कक्षा 9वीं में पढ़ने जाने वाली 6 हजार 900 से अधिक बालिकाओं को साईकिलें प्रदाय की गई हैं।
संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा ने बताया कि संभाग के ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को कक्षा 9वीं में पढ़ने के लिये जाने हेतु 6 हजार 908 बालिकाओं को निशुल्क साईकिलें प्रदान की गई हैं। जिसमें अनुसूचित जाति की एक हजार 718 बालिकायें, अनुसूचित जनजाति की 152 बालिकायें और पिछड़ा वर्ग एवं सामान्य वर्ग की 5 हजार 38 बालिकायें शामिल हैं। संभाग के दतिया जिले में एक हजार 17 बालिकाओं को, गुना जिले में 690 बालिकाओं को, ग्वालियर जिले में एक हजार 169 बालिकाओं को और शिवपुरी जिले में 2 हजार 656 बालिकाओं को निशुल्क साईकिलों का वितरण किया गया है।

ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण के काम को व्यवस्थित ढंग से अंजाम दें - कलेक्टर

ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण के काम को व्यवस्थित ढंग से अंजाम दें - कलेक्टर

प्रदेश व्यापी विशेष राजस्व अभियान का पांचवा चरण शुरू

25 मार्च 08/प्रदेश व्यापी विशेष राजस्व अभियान का पांचवा चरण 25 मार्च से ग्वालियर जिले में भी शुरू हो गया है। राजस्व विभाग के अंतर्गत योजनाओं और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के लिये इस अभियान का पांचवा चरण 25 जून तक चलेगा। जिला कलेक्टर श्री राकेश श्रीवास्तव ने अभियान के दौरान ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण कार्य को सुव्यवस्थित ढंग से करने के निर्देश संबंधित राजस्व अधिकारियों को दिये हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिये हैं कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास अधिकार पुस्तिकायें किसानों को मुहैया कराई जायें। साथ ही किसानों को एकीकृत भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिकायें भी प्रदान की जायें।
इस अभियान के अंतर्गत स्थायी सीमा चिन्हों का सत्यापन, मरम्मत योग्य एवं गुमशुदा सीमा चिन्हों का पुर्नस्थापन तथा भू-अभिलेख में इनकी प्रविष्टि की जायेगी। सीमांकन प्रकरणों का सिटीजन चार्टर में दी गई समयावधि के अनुसार निराकरण कराया जाना, खसरे के साथ-साथ नक्शों का अद्यतनीकरण कार्य, खसरा एवं बी-1 का मिलान कर सूची तैयार करना तथा उसका मिलान करना, खसरा, नक्शा एवं बी-1 की प्रतियां प्रदान करना, नक्शा नवीनीकरण तथा नक्शाविहीन ग्रामों के नक्शे तैयार कराना, शासकीय एवं निस्तार हेतु सुरक्षित भूमियों से अतिक्रमण हटाने तथा ग्रामीणों के निस्तार हेतु भूमि सुरक्षित रखने की कार्यवाही, नामांतरण एवं बंटवारा और भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिकाएं वितरित करने जैसे राजस्व संबंधी कार्य भी संपादित किये जायेंगे।
मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास अधिकार पुस्तिका देगी वास्तविक स्वामित्व
राज्य शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के भूमि और भवन के धारकों को आवास अधिकार पुस्तिका प्रदान की जायेगी। इस आवास अधिकार पुस्तिका में भूमि अथवा भवन के स्वामी द्वारा धारित भूमि अथवा भवन का क्षेत्रफल, चतुर्सीमा, ग्राम, गली, मोहल्ला, मजरा-टोला आदि सहित अन्य प्रासंगिक विवरण दर्ज होगा।
वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में भू-राजस्व संहिता 1959 के अंतर्गत नागरिकों के रहवासी उद्देश्य हेतु आबादी भूमि सुरक्षित करने का प्रावधान मौजूद है। अभी प्रचलित व्यवस्था में अभिलेख देखकर यह सुनिश्चित नहीं होता कि कौन सी भूमि का स्वामी कौन व्यक्ति है और उस भूमि का क्या आकार है। वस्तुत: ग्रामीण व्यक्तियों के पास आबादी क्षेत्र में आवासीय भूमि अथवा भवन आदि स्थल पर तो मौजूद होते हैं और उनकी इस अचल सम्पत्ति की कीमत भी होती है, परंतु उनके पास इसके स्वामित्व या अधिकार का कोई अभिलेख नहीं होता है। लेकिन अब आवास अधिकार पुस्तिका से इस समस्या का समाधान हो सकेगा।
ग्रामीणों के पास 'आवास अधिकार पुस्तिका' होने से उनकी भूमि की खरीदी-बिक्री रजिस्ट्री हो सकेगी। बैंकिंग इन्स्टीटयूशन ग्रामीण भूमि और भवन पर उसके स्वामी को उसकी आवश्यकता और पात्रता के अनुसार ऋण दे सकेंगे। कोर्ट-कचहरी में जमानत आदि हेतु आवास अधिकार पुस्तिका उपयोग में लायी जा सकेगी। इसके अतिरिक्त भी अन्याय बहुत से कार्यों में उक्त अधिकार पुस्तिका का उपयोग किया जा सकेगा।

सरकार प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिये कृत संकल्पित

सरकार प्रदेश के चहुमुखी विकास के लिये कृत संकल्पित

श्रम एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री देवड़ा ने कल्याणीगांव में अनेक विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन किये

25 मार्च 08/प्रदेश के श्रम एवं अनुसूचित जाति कल्याण विकास मंत्री श्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व की सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिये कृत संकल्पित है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जो विकास कार्य पिछले 50 वर्षों में नहीं हुए थे वे कार्य इस सरकार ने मात्र 4 वर्षों में किये हैं। पूरे प्रदेश में विकास की गंगा बह रही है। मंत्री श्री देवड़ा आज डबरा विकासखंड के ग्राम कल्याणी में अनेक विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रमों के पश्चात आयोजित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक श्री कमलापत आर्य, भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष श्री बज्जर सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
जौरासी गांव में हैंडपंप खनन की घोषणा
अपने भ्रमण के दौरान मंत्री श्री देवड़ा ने ग्राम जौरासी में गांव वालों की मांग पर हैंडपंप खनन की घोषण करते हुये कहा कि ग्रामीणों की जो बुनियादी मांगें है उन्हें सरकार हरहाल में पूरा करेगी। उन्होंने ग्राम जौरासी में एक लाख रूपये लागत से विधायक निधि से नवनिर्मित सीमेंट कांक्रीट रोड का लोकार्पण भी किया। इस अवसर पर डबरा जनपद अध्यक्ष श्री तिवारी, किसान मोर्च के श्री अशोक जाटव, मंडल अध्यक्ष श्री प्रदीप शर्मा, श्री गोपाल सिंह राणा, सर्वश्री किसन लाल बघेल, हरीसिंह, हीरासिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
श्रम एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री देवड़ा ने कल्याणी ग्राम में विधायक निधि से एक लाख रूपये की लागत से बनाये गये सीमेंट कंक्रीट रोड का लोकार्पण, साढ़े तीन लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित शासकीय माध्यमिक विद्यालय भवन का लोकार्पण, एक लाख 5 हजार रूपये की लागत से निर्मित अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण, साढ़े सात लाख रूपये की लागत से निर्मित होने वाले उपस्वास्थ्य केन्द्र का भूमिपूजन और 11 वें वित्त आयोग एवं विधायक निधि एक लाख रूपये की लागत से नवनिर्मित स्वराज भवन का लोकार्पण किया। श्री देवड़ा ने गांव वालों की मांग पर कल्याणी गांव में मंगल भवन बनाने के लिये अपनी निधि से 5 लाख रूपये देने की घोषणा की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुये श्रम एवं अनूसूचित जाति कल्याण मंत्री श्री देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह की सरकार गरीब, किसानों, मजदूरों और बेसहारा लोगों के लिये जी-जान से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान के गांवों में देश की 70 प्रतिशत आबादी निवास करती है। मात्र 30 प्रतिशत आबादी शहरों में निवास करती है। गांवो में रहने वाले 70 प्रतिशत ग्रामीणों का जब तक विकास नहीं हो जाता, तब तक देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि गांव में ग्रामीणों की मुख्य मांग स्वच्छ पेयजल, इलाज के लिये स्वास्थ्य सुविधाएं, बच्चों की पढ़ाई के लिये स्कूलों की व्यवस्था, गंदगी से निजात दिलाने के लिये सीमेंट कांक्रीट रोडों का निर्माण और पर्याप्त बिजली तथा अच्छी कानून व्यवस्था की है और इन सभी मांगों की पूर्ति के लिये सरकार खरी उतरी है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आजादी के बाद भी अगर कोई भी व्यक्ति हाथ जोड़ कर पेयजल, स्वास्थ्य, जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करे तो ऐसी सरकार का सत्ता में रहना का अधिकार नहीं है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा चलाई गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की प्रशंसा करते हुये कहा कि देश में सड़कों का जाल बिछता जा रहा है। देश के अधिकांश गांव मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। केवल अटल बिहारी वाजपेयी ही ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्होंने ग्रामीण सड़क योजना की चिंता व्यक्त की और इन सड़कों को प्रधानमंत्री सड़क योजना का नाम दिया।
प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का उल्लेख करते हुये श्री देवड़ा ने कहा कि सरकार ने हर वर्ग के कल्याण के लिये योजनाएं शुरू की हैं। मुख्यमंत्री मजदूर सुरक्षा योजना में प्रदेश के सभी मजदूरों का पंजीयन करके उनको परिचय पत्र दिये जा रहे हैं। इस योजना में मजदूरों के हित में कई योजनाएं संचालित है। इसमें मजदूरों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा सुविधा दी गई है।इसी तरह गरीबों के उपचार के लिये दीनदयाल उपचार योजना के तहत प्रति परिवार को 20 हजार रूपये तक नि:शुल्क उपचार देने, गंभीर बीमारी के इलाज के लिये जिला स्तर पर 75 हजार रूपये की सहायता देने, अगर 75 हजार रूपये से अधिक बीमारी पर खर्च होते हैं तो राज्य स्तर पर 3-4 लाख रूपये तक देने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार बगैर इलाज के किसी को भी मरने नहीं देगी इसके लिये मुख्यंत्री ने अपनी स्वेच्छा निधि में 9 करोड़ रूपये रूपये की व्यवस्था पृथक से की है। मंत्री श्री देवड़ा ने इस मौके पर अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। श्री देवड़ा ने इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के लोगों को जॉब कार्ड भी वितरित किये।
क्षेत्रीय विधायक श्री कमलापत आर्य ने कहा कि पूरे प्रदेश में विकास के कार्य तीव्रगति से चालू हैं। उन्होंने कहा कि कल्याणीगांव के लिये नलजल योजना स्वीकृत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 22 करोड़ रूपये की लागत की सिंध रमुआ सिंचाई परियोजना पर कार्य पूर्ण होने जा रहा है इसी प्रकार लधेरा सिंचाई योजना भी चुनाव तक पूर्ण कर ली जायेगी। इन दोनो योजनाओं से लगभग 15 गांव सिंचाई के क्षेत्र में आत्म निर्भर होकर संपन्न होंगें। श्री आर्य ने कहा कि एक करोड़ रूपये से अधिक लागत की बिलुआ भौड़ा सड़क, साढ़े तीन-तीन लाख रूपये की लागत की जौरासी देवगढ़ और रतनगढ़ माता सडक तथा 4 करोड़ 63 लाख रूपये की लागत के जिगनिया पुल निर्माण की स्वीकृति भी प्राप्त हो गई है। कार्यक्रम को भाजपा ग्रामीण जिला अध्यक्ष श्री बज्जर सिंह ने भी संबोधित किया।

सोमवार, 24 मार्च 2008

अमनपरस्ती, भाईचारे और तरक्की के माहौल में इजाफे की जरूरत - डा. जाखड़

अमनपरस्ती, भाईचारे और तरक्की के माहौल में इजाफे की जरूरत - डा. जाखड़
24 मार्च 08/राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने रविवार को विदिशा में रिमझिम बारिश के चलते महफिल-ए-मुशायरा की शमा रौशन की। होली और मिलाद उन्नबी के मौके पर आयोजित इस मुशायरे में डा. जाखड़ ने कहा कि आज इन्सानी समाज में अमनपरस्ती, भाई चारे और तरक्की के माहौल में इजाफे की सख्त जरूरत है। यह अहम काम शायरों, कवियों और साहित्यकारों से बेहतर कोई नहीं कर सकता।
राज्यपाल डा.जाखड़ ने हिन्दुस्तान की आजादी की लड़ाई में शायरों, कवियों और साहित्यकारों द्वारा लोगों में पैदा किये गये जज्बे को याद करते हुए कहा कि आज भी उसी जज्बे को पुख्ता बनाने की जरूरत है। मुशायरे के इस मंच को आम आदमी की तफरीह और मसअले को उठाने का जरिया बनाया जाए। डा. जाखड़ ने देर रात तक मुशायरे का लुत्फ उठाया और शायरों की होस्लाअफजाई की। इस अवसर पर वित्तमंत्री श्री राघव जी भी उपस्थित थे।

जिलों में रेडक्रास महिला विंग्स की जरूरत - राज्यपाल डा. जाखड़

जिलों में रेडक्रास महिला विंग्स की जरूरत - राज्यपाल डा. जाखड़
24 मार्च 08/राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने रविवार को विदिशा जिला मुख्यालय पर भारतीय रेडक्रास सोसायटी की महिला विंग द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में भाग लिया। घर-समाज में महिलाओं के समर्पण और सेवाओं का जिक्र करते हुए डा. जाखड़ ने कहा कि हर जिले में महिला विंग गठित करने की जरूरत है। जरूरतमंदों की सेवा के लिए विदिशा जिले की महिला विंग द्वारा किये जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि इस तरह के सेवा कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाए। प्रशासन भी ऐसे कार्यों में सहयोगी की भूमिका निभाए। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री राघवजी भी उपस्थित थे।

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता उत्तम रहे - राज्यपाल डा. जाखड़

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता उत्तम रहे - राज्यपाल डा. जाखड़
24 मार्च 08/राज्यपाल डा. बलराम जाखड़ ने कहा है कि प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता उत्तम रहे तथा मेधावी विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल बने। ऐसा प्रयास किसी भी राजनीति तथा भेदभाव से परे रहकर होना चाहिए। वे आज यहां राजभवन में प्रदेश के विश्वविद्यालयों की राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
बैठक में तय किया गया कि आगामी शिक्षा सत्र 2008-09 में कम से कम 200 दिवस का शैक्षणिक केलेण्डर बनाया जाए तथा छात्रों से लिए जाने वाले शुल्कों में एक रूपता रहे। यह भी तय किया गया कि आगामी शिक्षा सत्र से स्नातकोत्तर के अलावा स्नातक कोर्सों में भी सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाए। राज्यपाल ने निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के लिए महाविद्यालयों व विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों की पूर्ति शीघ्र की जाए और विश्वविद्यालयों में जरूरी प्रशासनिक सुधार किए जाएं।
बैठक का संचालन कर रही प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्रीमती स्नेहलता श्रीवास्तव ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से स्वीकृत राशि के संदर्भ में उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा उत्तम शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए प्रयोगशालाओं के भवन तथा कन्या छात्रावासों के भवन निर्माण जैसी योजनाओं के तहत अधिकाधिक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के प्रस्ताव भेजे जाएं। बैठक में प्रमुख सचिव ने बताया कि महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में वृध्दि के प्रयास भी जरूरी हैं। आगामी वर्षों में विद्यार्थियों का दाखिला 15 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए। आपने बताया कि शासन ने महाविद्यालयों में लगभग 800 रिक्त पदों की पूर्ति के लिए लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा है जिसकी कार्यवाही भी शुरू हो गयी है।
बैठक में कुलपतियों ने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न स्तरों पर शुल्क वृध्दि की जरूरत बतायी। बैठक में विश्वविद्यालयीन कर्मचारियों अधिकारियों को देय विभिन्न भत्तों, पेंशन तथा ग्रेच्युटी आदि के संदर्भ में कुलपतियों द्वारा आम सहमति के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्णय भी लिया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सुधार के लिए अनुदेशों व परिनियमों में जरूरी संशोधन एवं नए परिनियमों का अनुमोदन किया गया।
बैठक में प्रमुख सचिव श्रीमती स्नेहलता श्रीवास्तव, राज्यपाल के सचिव श्री के.के. सिंह, उच्च शिक्षा आयुक्त श्री आशीष उपाध्याय, वित्त सचिव श्रीमती सुधा चौधरी तथा प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भी भाग लिया।

मध्यप्रदेश में वन रोपण की तीन नवीन योजनाओं के बेहतर परिणाम मिले

मध्यप्रदेश में वन रोपण की तीन नवीन योजनाओं के बेहतर परिणाम मिले
अगले वित्तीय वर्ष के लिये निर्धारित लक्ष्य में बढ़ोत्तरी
24 मार्च 08/मध्यप्रदेश में वन रोपण की तीन नवीन योजनाएं गत वर्ष से शुरू की गई हैं। वन रोपण की प्रारंभ की गई योजनाओं में ऊर्जा वन की स्थापना, चारागाह विकास तथा विद्या वन योजना है। इन योजनाओं के बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। अगले वित्तीय वर्ष में इन योजनाओं के विकास के लिये निर्धारित लक्ष्य में बढ़ोत्तरी की गई है।
• ऊर्जा वन स्थापना की योजना से अगले वित्तीय वर्ष में दो हजार गाँवों में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पौधा रोपण होगा
• चारागाह विकास योजना से करीब दो हजार ग्रामों में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में होगा चारागाह विकास
• विद्या वन योजना के तहत आने वाले वित्तीय वर्ष में दो हजार 400 स्कूलों में लगभग ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
जलाऊ लकड़ी की मांग एवं प्राकृतिक वन क्षेत्रों में इसी उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है। मांग एवं आपूर्ति के बड़े अंतर के दृष्टिगत ऊर्जा वन स्थापना की एक अभिनव योजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत वन क्षेत्रों से लगे गाँवों के पास उपलब्ध भूमि पर सुबबुल, बबूल, प्रोसोपिस, जुलीफलोरा जैसी तेजी से बढ़ने वाली तथा जलाऊ उत्पादक प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। योजना के प्रथम वर्ष में एक हजार 212 ग्रामों में 23 हजार 576 हेक्टेयर क्षेत्र में ऊर्जा वन की स्थापना का कार्य किया गया है। अगले वित्तीय वर्ष में दो हजार गाँवों में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में पौधा रोपण का कार्य किया जायेगा। इससे न केवल ग्रामीणों को जलाऊ लकड़ी की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि इससे वनों पर पड़ने वाले जैविक दबाव में भी उल्लेखनीय कमी आयेगी।
चारे की बढ़ती समस्या के समाधान के लिये चारागाह विकास की नई योजना प्रारंभ की गई है। मवेशियों की बढ़ती संख्या के कारण वनों पर निरंतर दबाव बढ़ता ही जा रहा है। इस समस्या को ध्यान में रखते हुए वनों के समीपवर्ती गाँवों के पास उपलब्ध भूमि पर चारागाह विकास की योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत पशु चारा की दृष्टि से उपयोगी प्रजातियों के बीजों की बोवाई की जाती है। अब तक 577 ग्रामों में 13 हजार 943 हेक्टेयर क्षेत्र में चारागाह विकास का कार्य किया गया है। अगले वित्तीय वर्ष में दो हजार गाँवों में 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में चारागाह विकास करने की योजना का लक्ष्य रखा गया है।
इसी प्रकार विद्यार्थियों में वृक्षों के प्रति लगाव एवं पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से विद्या वन योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत शिक्षण संस्थाओं के परिसरों में विद्यार्थियों की सहभागिता से फलदार, छायादार एवं शोभादार प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है। विद्या वन योजना के तहत 690 शिक्षण संस्थाओं में 97 हजार पौधों का रोपण किया गया है। आने वाले वित्तीय वर्ष में दो हजार 400 स्कूलों में करीब ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।